अव्यय (Indeclinable Words) - Haveprasadhindi

अव्यय की परीभासा? वह शब्द जिनके रूप में लिंग, वचन और काल के प्रभाव से कोई परिवर्तन नहीं आता। अव्यय या अविकारी शब्द पाँच प्रकार के हैं,अव्यय क्या है ?

                  अव्यय 


अव्यय
Indeclinable Words



अव्यय क्या है ?
What is Avaya ?
अव्यय की परीभासा?
अव्यय और उनकी प्रकार ?


अभी तक हमने संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया शब्दों के बारे में अध्ययन किया।और यकीनन लोगो को इनकी परिभाषा और इनकी अर्थ पता ही होगा। अगर ना पता  हो तो हमें सुचित हर दे।
 इनमें देखा कि लिंग, वचन, काल आदि के आधार पर इन शब्दों के कई रूप बदलते हैं। इनमें परिवर्तन आता है, अतः इन्हें विकारी कहा जाता है। इनके अतिरिक्त एक वर्ग ऐसे शब्दों का है जिनपर लिंग, वचन, काल आदि का कोई
प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे-आज, तेज, जल्दी, धीरे, कल, वाह, परंतु, लेकिन, ताकि आदि।
अपरिवर्तित रहने के कारण इन्हें अधिकारी या अव्यय कहा गया। इस प्रकार अव्यय वे
शब्द हैं जिनके रूप में लिंग, वचन और काल के प्रभाव से कोई परिवर्तन नहीं आता।

अव्यय की परीभासा?

 वह शब्द जिनके रूप में लिंग, वचन और काल के प्रभाव से कोई परिवर्तन नहीं आता।

अव्यय या अविकारी शब्द पाँच प्रकार के हैं


अव्यय





1. क्रियाविशेषण

2. संबंधबोधक

3. समुच्चयबोधक

4. विस्मयादिबोधक

5. निपात

अव्यय

अव्यय और उन्के प्रकार






क्रियाविशेषण


 आज आँधी आई थी। * विद्यार्थी घूमकर रात को लौटे।

* बच्चा धीरे-धीरे चलने लगा। * आप इधर आइए। आज रात को, धीरे-धीरे, इधर क्रिया के बारे में कुछ विशेष जानकारी दे रहे हैं। क्रिया के बारे में विशेष जानकारी देनेवाले शब्द क्रियाविशेषण कहलाते हैं।

कोई क्रिया कहाँ, कब, कितनी कैसे घट रही है इसी आधार पर विभिन्न तथ्यों की जानकारी देनेवाले पदों के चार भेद हो सकते हैं

(i) रीतिवाचक क्रियाविशेषण जो पद, क्रिया किस ढंग से हुई, किस तरीके।


रोति को अपनाया आदि के बारे में बताएँ वे रीतिवाचक क्रियाविशेषण होते हैं। इनको पहचानने के लिए 'कैसे किस प्रकार आदि प्रश्न लगाकर देखिए, /

उत्तर में प्राप्त शब्द रीतिवाचक क्रियाविशेषण होगा। जैसे

वह तेज दौड़ा

* वह ज़ोर से रोया।

* जल्दी जल्दी पहुंची।

(कैसे दौड़ा ? तेज)

(किस प्रकार रोया ? जोर से)

(कैसे पहुंची? – जल्दी-जल्दी)

(ii) स्थानवाचक क्रियाविशेषण जो क्रियाविशेषण क्रिया कहाँ घट रही हैं, उस स्थान का संकेत करें, वे स्थानवाचक क्रियाविशेषण होते हैं। इनके लिए 'कहाँ' से प्रश्न करें, उत्तर में कोई स्थान निर्देश आएगा। जैसे


* आप यहाँ बैठिए।

* उसका घर ऊपर है। (घर कहाँ है? – ऊपर) * इधर-उधर नजर घुमाओ (सरकहाँ घुमाओं? इधर-उधर)

यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, इधर-उधर, बाहर-भीतर, चारों तरफ, पास, दूर, आगे पीछे आदि स्थानवाचक क्रियाविशेषण हैं।

(iii) कालवाचक क्रियाविशेषण जो पद यह बताएं कि कोई क्रिया कब घटी,


कालवाचक क्रियाविशेषण होते हैं। जैसे- कभी, अब, तब, आजकल, प्रतिदिन, रोज सुबह, शाम, रात, छह बजे, प्रतिवर्ष प्रातः, नित्य, बहुधा आदि। 'कब' प्रश्न लगाकर देखना चाहिए, उत्तर में समय के बारे में जानकारी मिले तो कालवाचक क्रियाविशेषण समझना चाहिए।

* यह प्रतिदिन गरीबों की सेवा के लिए जाती है। (कब जाती है? प्रतिदिन)

● इसे अभी पूरा कर लीजिए (कब पूरा कर लीजिए? अभी) 

(iv) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण जो क्रियाविशेषण क्रिया की मात्रा या


परिमाण की ओर संकेत करें, वे परिमाणवाचक क्रियाविशेषण होते हैं।

"कितना/कितनी प्रश्न लगाकर देखिए।

वह थोड़ा चल सकती है। (कितना चल सकती है? थोड़ा)

* वह ज्यादा खाता है, जो ठीक नहीं। (कितना खाता है? ज्यादा) • कुछ संज्ञाएँ प्रत्यय निपात/किसी शब्द का सहारा लेकर समास बन जाती हैं और ये समास क्रियाविशेषण का कार्य करते हैं। इन्हें यौगिक क्रियाविशेषण भी कहते हैं।

• छात्रों को कक्षा में ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए।

यहाँ ध्यानपूर्वक क्रियाविशेषण की तरह कार्य कर रहा है।

● कुछ शब्द विशेषण और क्रियाविशेषण- दोनों की तरह प्रयुक्त होते हैं। उनके प्रयोग

से निर्णय लें कि ये क्या है? जैसे

* यह बच्चा प्यारा है (विशेषण)

• यह बच्चा प्यारा लगता है। (क्रियाविशेषण) 
● एक ही वाक्य में एकाधिक क्रियाविशेषण हो सकते हैं
वहाँ  - स्थानवाचक क्रियाविशेषण
• हमें यहाँ जल्दी पहुंचना होगा।
जल्दी  - रौतिवाचक क्रियाविशेषण।

 ● विशेषण की विशेषता बतानेवाले प्रविशेषण होते हैं, उसी प्रकार से क्रियाविशेषण की विशेषता बताने वाले प्रविशेषण, क्रियाविशेषण के साथ भी प्रयुक्त होते हैं ।

• वह  बहुत जल्दी में था।

संबंधबोधक अवयय 



हमारे घर के पास अमलतास के पेड़ लगे हैं।

* बच्चे माँ के साथ बाजार गए हैं।

कुछ अव्यय इस प्रकार हैं - के भीतर, की ओर, से पहले।

- के बिना, के बगैर

- के अनुसार, के विपरीत, के के कारण, की वजह से। अनुकूल।

- के बदले, की जगह

- के बारे में, के विषय में।

- के साथ, के संग

क्रियाविशेषण की तरह ही यह भी काल, स्थान या दिशा का बोध करवाते हैं

* राम घर के अंदर बैठा है।

यहाँ के अंदर संबंधबोधक है क्योंकि घर (संज्ञा) के साथ संबंध है जबकि 'राम 'अंदर बैठा है' में क्रिया कहाँ हो रही है? इस प्रश्न का उत्तर मिलता है अंदर अतः 'अंदर' क्रियाविशेषण है।

संबंधबोधक अव्ययों का प्रयोग हमेशा परसर्ग अथवा कारकीय विभक्ति के, की. से आदि के साथ ही होता है, नहीं तो ये संज्ञा, विशेषण या क्रियाविशेषण बन जाएँगे।


समुच्चयबोधक


सूर्या और नंदिनी घर पर हैं। इस वाक्य में 'और' दो पदों को जोड़ रहा है। जो अव्यय दो शब्दों, दो पदबंधों, दो वाक्यों को आपस में संयोजित (जोड़ने का भाव) करते वे समुच्चयबोधक या योजक कहलाते हैं। समुच्चयबोधक जोड़ने (और, एवं) के अतिरिक्त विरोध बताने का कार्य (लेकिन, परंतु); कारण, परिणाम बताने का कार्य (इसलिए, अतः, क्योंक); विकल्प बताने का कार्य (या, अथवा, चाहे) भी करते हैं। इन योजकों के दो भेद किए जा सकते हैं

(i) समानाधिकरण समुच्चयबोधक ये ऐसे योजक हैं जो दो समान स्तरवाले अंशों को जोड़ने का कार्य करते हैं। जैसे-और, तथा, किंतु, इसलिए।

) जोड़ने का कार्य - और, तथा, एवं

* कृष्ण और सुदामा संदीपन गुरु के यहाँ पढ़ते थे।

* वह बाजार गया और फल लाया।

( ख ) विरोधदर्शक-पर, परंतु, अपितु, बल्कि, लेकिन, किंतु, मगर
वह परिश्रमी तो है परंतु प्रतिभाशाली नहीं।

● उसने आने को कहा था मगर आया नहीं।


(ग) विकल्प-या अथवा, अन्यथा, न कि, या... या नहीं तो
खाने पर ध्यान दो अन्यथा बीमार हो जाओगे।

ॐ या तो तुम चले आना या मैं जाऊँगो ।


(घ) परिणामदर्शक-अतः, इसलिए, फलतः ।



* मेहनत की थी, अत: सफलता भी मिल गई।

* कोशिश नहीं की इसलिए चुनाव हार गया।

(ii) व्यधिकरण समुच्चयबोधक- ये योजक आवित वाक्यों को जोड़ते हैं

(क) हेतुबोधक-क्योंकि, इसलिए, चूँकि, इस कारण

* उसे पौधे खरीदने थे इसलिए नर्सरी गया है।

(ख) संकेतबोधक-यद्यपि तथापि, यदि... तो चाहे... तो भी।

* यद्यपि काम मुश्किल है तथापि करने की कोशिश करूंगा।

(ग) स्वरूपबोधक-अर्थात, मानो, यानी, यहाँ तक

* ऐसा लगा मानो तेज आँधी आएगी।

(घ) उद्देश्यबोधक-

ताकि, जिससे कि ।

उसने दिन-रात काम किया जिससे अपने बच्चे का इलाज करवा सके।

  • समानाधिकरण और व्यधिकरण दोनों में 'इसलिए' योजक आता है, अत: उनके प्रयोग को समझना चाहिए और उसी आधार पर समानाधिकरण या व्यधिकरण का भेद करना चाहिए।

समानाधिकरण मै इसलिए परिणाम को दर्शाता है ।



4. विस्मयादिबोधक


हर्ष विस्मय, घृणा, दुख, पीड़ा आदि मनोभावों को प्रकट करनेवाले पद विस्मयादिबोधक कहलाते हैं। जैसे—'छिः', 'ओह', 'अरे' आदि। ये शब्द किसी को सूचना देने के लिए नहीं होते, बल्कि उद्गार व्यक्त करने के लिए स्वयं ही मुख से निकलते हैं

1. विस्मय आश्चर्य

अरे! हैं! क्या!

2. शोक / पीड़ा/ग्लानि हाय! उफ़! ओ माँ!

3. हर्ष उल्लास - अहा! वाह! बहुत अच्छा!

4. प्रशंसा- शाबाश! सुंदर!


5. तिरस्कार / घृणा छिः छिः ! धिक्कार।

6. चेतावनी  सावधान! होशियार! बची!

7. संबोधन - हे! अजी!


8. संवेदना  राम राम! हाय!


 *विस्मयादिबोधक वाक्य के प्रारंभ में ही आते हैं।


* वाक्य के अन्य शब्दों से इनका कोई संबंध नहीं होता।

* शब्दों या वाक्यों के बाद विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है।


निपात


वे अव्यय जो किसी शब्द पद के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष बल देते हैं, उन्हें निपात कहा जाता है। अवधारणा (बल) देने के कारण इन्हें अवधारक शब्द भी कहा

जाता है। जैसे

ही -  आपको ही जाना होगा।

भी  - तुम भी चलो तो अच्छा होगा।

तो - वह तो काम से बचता है।

तक - सुबह तक ठीक हो जाएगा।

मात्र  - कह देने मात्र से काम नहीं चलेगा।

भर- होरी जीवनभर संघर्ष करता रहा।



टिप्पणियाँ

  1. Raunak
    Nice
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