Samachar patra par nibandh । समाचार पत्र पर निबंध । essay on newspaper | essay on sanachar patra

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निबंध लेखन -  समाचार-पत्र


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समाचार-पत्र

समाचार पत्र पर निबंध । essay on newspaper
समाचार पत्र पर निबंध । essay on newspaper




समाचार पत्र आधुनिक युग में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। देश-विदेश में घटित होने वाली घटनाओं, राजनैतिक गतिविधियों, पर्वों आदि की जानकारी देने में इनकी भूमिका अद्वितीय है।

समाचार पत्र का आरंभ इटली में तेरहवीं शताब्दी में हुआ था।

भारत में ब्रिटिश शासनकाल में जनवरी 1780 ई. में 'बंगाल गजट नामक समाचार पत्र प्रकाशित हुआ था। इसके बाद 1835 ई. में 'इंडिया गजट' प्रकाशित हुआ था। आजकल अनेक प्रकार के समाचार-पत्र छपने लगे हैं। जैसे- दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक दैनिक समाचार पत्र तो अपने प्रभात तथा संध्या के संस्करणों का प्रकाशन भी करते हैं। हमारे देश के कुछ प्रसिद्ध समाचार पत्र हैं- हिंदुस्तान टाइम्स, दी हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, पंजाब केसरी, जनसत्ता, दैनिक जागरण, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि। 
हिंदी तथा अंग्रेजी के इन प्रसिद्ध समाचार पत्रों के अतिरिक्त भारत की अनेक प्रादेशिक भाषाओं में भी समाचार पत्र छपते हैं। समाचार पत्र जनता की आवाज है। यह एक दर्पण है, जो हमें सच्चाई की तस्वीर दिखाता है। अनेक बार यह सरकार की गलत नीतियों का पर्दाफाश करता है। अनेक घोटालों का कच्चा चिट्ठा खोलकर जनता के सामने रखता है। इसके माध्यम से जहाँ एक ओर सरकार का दृष्टिकोण प्राप्त होता है, वहीं दूसरी ओर जनता की समस्याओं और अभिलाषाओं को वाणी मिलती है। इनमें छपने वाले लेख, कहानियाँ, कविताएँ, हास्य रचनाएँ हमारा मनोरंजन तथा पथ-प्रदर्शन करती हैं। 

यही नहीं, व्यापारी वर्ग अपनी वस्तुओं के विज्ञापन देकर बिक्री बढ़ाते हैं। नवीन की
जानकारी, ज्ञान-विज्ञान संबंधी लेख तथा महान पुरुषों के चरित्रों का वर्णन जैसी सामग्री विद्यार्थियों के लिए आत लाभकारी सिद्ध होती है।

दूरदर्शन के प्रसारण की जानकारी, खेल और मौसम संबंधी समाचार देने में समाचार पत्रों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। समाचार पत्र जनमत बनाता है। अतः सरकार एवं विरोधी पक्ष दोनों ही इससे डरते हैं और इसका आदर भी करते हैं। यह लोकतंत्र का सजग प्रहरी है। यह हमें अनमोल जानकारियाँ देता है।

समाचार पत्र से लाभ के साथ हानियाँ भी हैं। अनेक बार समाचार पत्रों में विज्ञापनों को गलत तथा अश्लील ढंग से छापा जाता है। फिल्मी दुनिया की अर्धनग्न तस्वीरें प्रस्तुत की जाती हैं। चुनावी दिनों में किसी एक पार्टी का पक्ष प्रस्तुत करके, ये लोकतंत्र के लिए गलत कार्य भी कर जाते हैं। कई समाचार-पत्र सांप्रदायिक भावनाएँ भड़काने वाले समाचार भी छापते हैं। इनसे देश की एकता खतरे में पड़ती है।

वास्तव में समाचार-पत्र मनुष्य को समाज, देश और विश्व से जोड़ते हैं। समाचार पत्रों को चाहिए कि वे निष्पक्ष रहकर अपना कार्य करें। उनका लक्ष्य सरकार की कठपुतली बनना न हो, बल्कि सच को जनता तक पहुंचाना हो। समाचार-पत्र तो 'कलम का सिपाही' है। देश तथा समाज को संभालना इसका कर्त्तव्य है।

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