बसंत ऋतु पर निबंध- अनुछेद । basant ritu par nibandh in hindi | Essay on spring season in hindi
बसंत ऋतु पर निबंध- अनुछेद । basant ritu par nibandh in hindi | Essay on spring season in hindi,जब प्रकृति का कण-कण उल्लास से भर कर निखर उठता है, शीतल,
बसंत ऋतु
बसंत ऋतु पर निबंध- अनुछेद ।
बसंत ऋतु पर अनुछेद
Essay on basant ritu
basant ritu par nibandh in hindi |
Essay on spring season in hindi
बसंत ऋतु
जब प्रकृति का कण-कण उल्लास से भर कर निखर उठता है, शीतल, मंद सुगंध हवा बहने लगती है, फूल खिल उठते हैं, कोयल कूकने लगती है तो ऋतुओं के सम्राट बसंत का आगमन होता है। बसंत को 'ऋतुराज' कहा जाता है।
वसंत ऋतु सभी ऋतुओं से अधिक सुहावनी होती है। इस समय न अधिक गर्मी होती है और न अधिक सर्दी दूर-दूर तक खेतों में पीली सरसों खिलती है। पेड़ों पर नई कॉपलें आ जाती हैं। बागों में पौधे नए-नए फूलों से भर जाते हैं। फूलों पर तितलियाँ और भँवरे मंडराने लगते हैं। आमों के वृक्ष बौर से लद जाते हैं। चारों ओर कोयल की मधुर कूक सुनाई देती है। हर तरफ हरियाली छा जाती है। सुगंधित हवा धीमी-धीमी बहने लगती है। चारों ओर उमंग, खुशी और सौंदर्य का राज्य छा जाता है। प्रकृति एक नई दुल्हन की भाँति सज जाती है।
बसंत पंचमी से बसंत ऋतु की शुरूआत होती है। इसी दिन ज्ञान की देवी सरस्वती का जन्म हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। बसंत ऋतु में ही गुरु गोबिंद सिंह के दोनों पुत्रों ने धर्म को रक्षा के लिए बलिदान दिया था।
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन होता है। सभी पीले वस्त्र पहनते हैं। आकाश पीले रंग की पतंगों से पर है। लोग पीले रंग का हलवा तथा पकवान खाते हैं।
बसंत ऋतु स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी होती है। बसंत ऋतु में घूमना लाभकारी माना गया है। चारों ओर का स्वच्छ वातावरण तन-मन के लिए लाभकारी होता है। बसंत में खुले स्थानों पर घूमने से तन-मन में जोश और उल्लास आ जाता है। इन दिनों सूर्य की गरमी भी अधिक नहीं होती। न केवल मनुष्य बल्कि पूरे प्राणी जगत के लिए यह ऋतु लाभकारी होती हैं।
वसंत ऋतु सभी ऋतुओं से अधिक सुहावनी होती है। इस समय न अधिक गर्मी होती है और न अधिक सर्दी दूर-दूर तक खेतों में पीली सरसों खिलती है। पेड़ों पर नई कॉपलें आ जाती हैं। बागों में पौधे नए-नए फूलों से भर जाते हैं। फूलों पर तितलियाँ और भँवरे मंडराने लगते हैं। आमों के वृक्ष बौर से लद जाते हैं। चारों ओर कोयल की मधुर कूक सुनाई देती है। हर तरफ हरियाली छा जाती है। सुगंधित हवा धीमी-धीमी बहने लगती है। चारों ओर उमंग, खुशी और सौंदर्य का राज्य छा जाता है। प्रकृति एक नई दुल्हन की भाँति सज जाती है।
बसंत पंचमी से बसंत ऋतु की शुरूआत होती है। इसी दिन ज्ञान की देवी सरस्वती का जन्म हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। बसंत ऋतु में ही गुरु गोबिंद सिंह के दोनों पुत्रों ने धर्म को रक्षा के लिए बलिदान दिया था।
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन होता है। सभी पीले वस्त्र पहनते हैं। आकाश पीले रंग की पतंगों से पर है। लोग पीले रंग का हलवा तथा पकवान खाते हैं।
बसंत ऋतु स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी होती है। बसंत ऋतु में घूमना लाभकारी माना गया है। चारों ओर का स्वच्छ वातावरण तन-मन के लिए लाभकारी होता है। बसंत में खुले स्थानों पर घूमने से तन-मन में जोश और उल्लास आ जाता है। इन दिनों सूर्य की गरमी भी अधिक नहीं होती। न केवल मनुष्य बल्कि पूरे प्राणी जगत के लिए यह ऋतु लाभकारी होती हैं।
