ब्राह्मण और सात परियाँ | Brahman aur sat pariya | saat pariyon ki kahani

ब्राह्मण और सात परियाँ Brahman aur sat pariya ब्राह्मण और सात परियाँ Aalsi Brahman आलसी ब्राह्मन हिन्दी कहानियाँ हिन्दी कहानी Hindi kahani ,Have

 ब्राह्मण और सात परियाँ

Brahman aur sat pariya
ब्राह्मण और सात परियाँ
Aalsi Brahman 
आलसी ब्राह्मन 
हिन्दी कहानियाँ 
हिन्दी कहानी 
Hindi kahani 

saat pariyon ki kahani

सात परियों की कहानी



ब्राह्मण और सात परियाँ


Hindi kahani | brahman aut sat pariya | HavePrasad hindi
ब्राह्मण और सात परियाँ






बहुत पुरानी बात है। किसी गाँव में एक ब्राह्मण रहता था। वह बहुत अधिक आलसी था। वह
परिश्रम करना बिलकुल पसंद न करता था। फिर भी किसी तरह उसका और उसकी पत्नी का गुज़ारा हो रहा था। किंतु उसकी पत्नी उससे हमेशा झगड़ती रहती थी और कोई अच्छा कार्य करके घर की आर्थिक दशा सुधारने पर जोर देती थी। एक शाम दोनों पति पत्नी में इसी बात को लेकर गंभीर झगड़ा हुआ। अगली सुबह ब्राह्मण ने अपना गाँव छोड़कर किसी अन्य जगह पर जाकर अपना भाग्य आज़माने का निर्णय ले लिया। उसकी पत्नी ने रास्ते में खाने के लिए रोटियाँ बनाई और एक कपड़े में बांधकर उसे दे दीं। उस कपड़े में कुल सात रोटियाँ थीं।

ब्राह्मण ने रोटियाँ ली और घर से चल पड़ा। दोपहर होते-होते वह अपने गांव से बहुत दूर निकल गया था। रास्ते में यह एक छायादार वृक्ष के नीचे आराम करने बैठ गया। उसे बहुत भूख लगी थी। इसीलिए उसने रोटियों की पोटली उठाई और उसे खोला। रोटियों की ओर देखते हुए वह बोला "मैं बहुत भूखा हूँ। मैं एक ही बार में सातों को खो जाऊँगा।"

उस वृक्ष पर परियाँ रहती थी। वे ब्राह्मण के मुख से ऐसे वचन सुनकर बहुत डर गई। उन्होंने सोचा कि वह ब्राह्मण उन्हें खाना चाहता है। वे तुरत पेड़ से नीचे आई और ब्राह्मण के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई। बोली- "हे ब्राह्मण, कृपया हमें मत खाना। हमारे प्राण बरखा दो, बदले में हम आपको एक जादुई बकरी देती है। जब भी यह बकरी चरने के लिए अपना मुँह खोलेगी इसके मुख से सोने के सिक्के गिरेंगे।"

ब्राह्मण सारी बात समझ गया। उसने तुरंत पोटली एक ओर रखी और बोला- "ठीक है, मैं तुम्हें नहीं खाऊँगा। लाओ, मुझे जादुई बकरी दे दो।" परियों ने उसे अपने वादे के अनुरूप जादुई बकरी दे दी। वह ब्राह्मण उस बकरी को लेकर अपने घर की ओर चल दिया।

रास्ते में एक गाँव में उसका एक मित्र रहता था। शाम होने के कारण ब्राह्मण अपने उस मित्र के घर ठहर गया। उसने अपने मित्र के घर रात का खाना खाया। खाना खाने के बाद जब वह
अपने उन मित्र के पास बैठा तो उसने मित्र को उन परियो और जादुई बकरों के बारे में बता दिया। इसके बाद ब्रहमण सो गया।

रात को उसका मित्र मेरी के पास गया और उसने बकरी के आगे घास डाली । जैसे ही बकरी ने घास खाने के लिए अपना मुंह खोला तो उसके मुंह से सोने के सिक्के गिरे। उसने सारे सिक्के उठाएं और एक संदूक में रख दिए। बाद में उसने बकरी चुराने की योजना बनाई और उस जादुई बकरी के स्थान पर एक साधारण बकरी बाँध दी। उसने जादुई बकरी को अपने आड़े में छुपा दिया।

सुबह होने पर ब्राह्मण अपने घर के लिए चल दिया। घर पहुंच कर उसने अपनी पत्नी को जादुई बकरी दिखाते हुए सारी कहानी सुनाई। फिर बकरी के आगे घास डाली पर  बकरी ने घास खाने के लिए मुँह खोला तो उसके मुंह से सोने का कोई सिक्का न गिरा। उसको पत्नी उसको मूर्खता पर आग बबूला हो गई और उससे झगड़ने लगी। ब्राह्मण को बड़ा दुख हुआ।

अगले दिन सुबह-सुबह उठकर ब्राहमण उसी पेड़ के नीचे गया। बोला- "हे परियो, तुमने मुझे धोखा दिया है। मैं तुम सबको मार डालूंगा।" परियों ने कहा- "वह बकरी वास्तव में एक जादुई बकरी थी। उसका जादू कैसे निष्प्रभावी हुआ, हम नहीं जानती।"

इस बार परियों ने उसे एक जादुई थाली दी और कहा कि- “तुम जो भी अपनी पसंद के पकवान इस थाली से मांगोगे, यह तुरंत दे देगी।"

ब्राह्मण उस थाली को लेकर अपने घर के लिए चल दिया। इस बार भी रास्ते में वह अपने उसी मित्र के घर ठहरा। उसके मित्र ने पहले की तरह रात को उठकर उस जादुई थाली को चुरा लिया और उसके स्थान पर साधारण वाली रख दी।

ब्राह्मण सुबह उठा और थाली को लेकर अपने घर की ओर चल दिया। घर पहुंचकर उसने उस जादुई थाली के बारे में अपनी पत्नी को बताया। उसकी पत्नी ने इस जादुई थाली के जादू की जांच की तो वह साधारण थाली ही निकली। इस पर ब्राह्मण की पत्नी बहुत अधिक क्रोधित हुई। अगले दिन ब्राह्मण फिर से उन परियों के पास गया और आग उगलते हुए बोला- "हे परियों,
तुमने मुझे फिर से धोखा दिया। मैं तुम सबको मार डालूँगा।"

परियों ने कहा- “हे ब्राह्मण, हमने आपको कोई धोखा नहीं दिया। जरूर रास्ते में किसी अन्य व्यक्ति ने आपके साथ धोखा किया है।" परियों की बात सुनकर ब्राहम को अपने मित्र पर शक हुआ और उसने परियों को अपने मित्र के यहाँ ठहरने की बात बता दी।

अब की बार परियों ने उसे एक जादुई रस्सी और छड़ी दी और कहा कि इन्हें   लेकर रात को    अपने मित्र के घर ठहरना, अवश्य दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।



ब्राह्मण वह जादुई रस्सी और डंडा लेकर अपने मित्र के घर पहुंचा। रात को जब वह खाना खाकर सो गया तो उसका मित्र उठा और उसके थैले को खोलकर देखने लगा। देखते देखते जादुई रस्सी ने उसके मित्र के हाथ पाँव बाँध दिए और इंडे ने उसे पीटना शुरू कर दिया। वह सहायता के लिए चिल्लाया तो ब्राहमण उठ कर तुरंत उसके पास पहुंच गया। उसके मित्र से अब टुडे की मार न सही गई तो उसने ब्राहमण को अपनी सारी करतूत बता दी। ब्राहमण ने तुरंत उस डंडे और रस्सी को आदेश दिया कि उसके मित्र को मुक्त कर दें।




उन्होंने उसके मित्र को मुक्त कर दिया। उसके मित्र ने ब्राह्मण की जादुई बकरी और थाली उसे लौटा दी। ब्राह्मण सुबह होने पर उन्हें लेकर अपने घर पहुंचा। उसने अपनी पत्नी को सारी घटना बताई। उस जादुई बकरी और थाली ने उनके जीवन को खुशहाल बना दिया। उसके बाद दोनों पति-पत्नी सुखी जीवन जीने लगे।

-----XX-------


यहा इस कहानी  का अन्त होता है , आपको यह कहानी कैसी लगी, हम जरुर  सुनना चाहेंगे।
अपनी राय और सूझाव कमेंट बॉक्स मै जरुर दे।

हैव प्रसाद हिन्दी

टिप्पणियाँ

Leave comments according to the topic of the post, comments with active links will not be displayed.
Admins and blog authors have the right to display,, delete, , mark spam , , on comments posted.