घड़ी का इतिहास । घड़ी का आवषीकर । ghadi ka itihaas | ghadi history in hindi । घड़ी का अविष्कार के बारे मै

घड़ी का इतिहास । घड़ी का आवषीकर । ghadi ka itihaas | ghadi history in hindi । घड़ी का अविष्कार के बारे मै ,घड़ी शब्द हम सबके लिए बहुत जाना-पहचाना है ल

 घड़ी का इतिहास


घड़ी का इतिहास । घड़ी का आवषीकर  । ghadi ka itihaas





घड़ी का इतिहास

घड़ी का इतिहास
घड़ी का इतिहास





घड़ी शब्द हम सबके लिए बहुत जाना-पहचाना है लेकिन जरा सोचिए कि जब इसकी खोज नहीं हुई थी, तब लोग समय का अंदाज़ा कैसे लगाते थे? कहा जाता है कि प्राचीन काल में लोग सूर्य की गति देखकर समय का अंदाजा लगाते थे। उस समय समुद्री जहाज पर यात्रा करने वाले व्यापारी भी सूर्य की रोशनी देखकर समय का पता लगा लेते थे।


दुनिया की सबसे पहली धूपघड़ी मिस्र में बनाई गई थी लेकिन यह घड़ी केवल सूर्य की रोशनी में ही समय बता सकती थी। सूर्यास्त के बाद का समय बताने के लिए यह अनुपयोगी थी। सच ही कहा गया है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। मनुष्यों की इसी आवश्यकता से सोलहवीं शताब्दी में जलघड़ी का आविष्कार हुआ। यह सबसे पहले मिस्र के बेबीलोन में बनाई गई। इसमें किसी बड़े बरतन में सूर्योदय होते ही पानी भर दिया जाता था, जो नीचे के सुराख से बूंद-बूंद कर टपकता रहता था परंतु इस घड़ी में भी सुराख के छोटा या बड़ा होने से समय में अंतर पड़ जाता था।


इसके बाद रोम में रेतघड़ी बनाई गई। यह घड़ी डमरू के आकार की थी। इसके अलावा मोमबत्ती के जलने, रस्सी के सुलगने और लँप में तेल खत्म होने के आधार पर भी घड़ियाँ बनाई गई।


इस प्रकार घड़ियाँ तो कई प्रकार की बनती रहीं परंतु ये सभी बिलकुल सही समय बताने में असमर्थ थीं।


कल-पुर्जों से चलने वाली घड़ी कब और किसने बनाई, यह कहना मुश्किल है किंतु जिस तरह की घड़ी हम आज पहनते हैं, वैसी पहली घड़ी पहनने वाले पहले आदमी थे- प्रसिद्ध फ्रांसीसि गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज़ पास्कल। इन्हें कैलकुलेटर का भी आविष्कारक माना जाता है। लगभग 1650 के आसपास लोग घड़ी जेब में रखकर घूमा करते थे, ब्लेज़ पास्कल ने एक रस्सी से इस घड़ी को हथेली में बाँध लिया ताकि काम करते समय वे घड़ी देख सकें। उनके कई साथियों ने उनका मजाक भी उड़ाया लेकिन आज हम सब हाथ में घड़ी पहनते हैं।


पहले चाभी भरने वाली घड़ियाँ बनती थीं। जिनकी जगह अब क्वार्ट्ज ऑटोमेटिक तथा इलेक्ट्रॉनिक घड़ियों ने ले ली है। वास्तव में क्वार्ट्ज एक प्रकार का क्रिस्टल है, जिसमें स्थायी रूप से यांत्रिक गुण उपस्थित रहते हैं, एक खास तरह की क्वार्ट्ज घड़ी सेकेंड के एक लाखवें हिस्से को भी नाप सकती है।

घड़ी का आवषीकर  । ghadi ka itihaas |  ghadi history in hindi ।
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आइये  जानें घड़ी की विकास यात्रा


500-300 ई. पूर्व- मिस्र में पहली बार सूर्य घड़ी का उपयोग किया गया। .


400 ई. पूर्व- ग्रीस के लोग पत्ती की घड़ी से समय का पता लगाने लगे थे।


980 ई. राजा एफ्रेड जलती हुई मोमबत्ती से समय का निर्धारण करते थे।


गैलीलियो ने महसूस किया कि पेंडुलम के हिलने की गति उसकी 


-1583 ई.- लंबाई पर निर्भर करती है।


1657 ई. क्रिस्टिएन... हाइगंस ने पहली पेंडुलम घड़ी बनाई।


1838 ई. लुईस ऑडोमार्स ने पेंचदार घड़ी और उसकी यांत्रिकी की खोज की।


1868 ई. पैटेक फ़िलिपी ने पहली रिस्टवॉच का आविष्कार किया।


1888 ई. कॉर्टियर ने पहली लेडीज रिस्टवॉच बनाई।


1902 ई. पहली ओमेगा रिस्टवॉच बनी। जर्मनी में 93000 घड़ियाँ बिकीं।


1914 ई.पहली अलार्म रिस्टवॉच एटरना द्वारा बनाई गई।


1923 ई. पहली ऑटोमेटिक रिस्टवॉच जॉन हाईवुड द्वारा बनाई गई।


1925 ई. पैटेक फ़िलिपी ने कैलेंडर युक्त रिस्टवॉच बनाई।


1927 ई. पहली वॉटर रेसिस्टेंट पड़ी का निर्माण रोलैक्स ओएस्टर ने किया।


1930 ई. महिलाओं के लिए छोटे आकार की घड़ियाँ बनाई गई।


1945 ई. रोलेक्स डेट ने पहली ऐसी घड़ी बनाई, जिसमें तारीख भी थी।


1946 ई. ऑडोमार्स पिग्वेट ने दुनिया की सबसे पतली घड़ी बनाई।


1953 ई. लिप्स ने पहली बार बैटरी से चलने वाली घड़ी बनाई।


1957 ई.- हैमिल्टस ने पहली इलेक्ट्रॉनिक वाँच का निर्माण किया।


विश्व में कुछ घड़ियाँ ऐसी हैं, जो अपनी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है। अमेरिका में एक ऐसी घड़ी बनाई गई थी जो पाँच बार नमाज पढ़ने वालों के लिए समय विशेष पर विशेष ध्वनि निकालती थी। 


लंदन के संसद भवन में 'विगवैन वॉच' के नाम से एक ऐसी घड़ी रखी है जो प्रति घंटे जीसस क्राइस्ट के चार उपदेश पटल पर अंकित कर देती है। भारत में जोधपुर में भी एक ऐसी घड़ी रखी है जो इतना मधुर संगीत सुनाती है कि लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। विज्ञान के बढ़ते कदम धरती से अंतरिक्ष तक पहुँच गए हैं। वहाँ भी परमाणु घड़ियाँ उपग्रहों की स्थापना के समय काम आती हैं। परमाणु घड़ियों पर तापमान, गुरुत्वाकर्षण और वायुमंडल के दबाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।


घड़ियों के आविष्कार ने ही मानव को समय के साथ चलना सिखलाया है और जिसने भी समय का आदर किया, वह सफलता के उच्चतम शिखर तक पहुँच गया।

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