Mera chatra jeevan । मेरा छात्र जीवन

मेरा छात्र जीवन Mera chatra jeevan अपने छात्र जीवन पर अनुछेद लिखे। Apne chatra jeevan student's life par anuched likhe.एक व्यक्ति के जीवन में उसके

 मेरा छात्र जीवन



मेरा छात्र  जीवन 
Mera chatra jeevan 
अपने छात्र जीवन पर अनुछेद लिखे।
Apne chatra jeevan student's life par anuched likhe.

मेरा छात्र जीवन


Mera chatra jeevan  । मेरा छात्र जीवन

Mera chatra jeevan  । मेरा छात्र जीवन 




एक व्यक्ति के जीवन में उसके छात्र जीवन काल का विशेष महत्व है। इसी समय कोई व्यक्ति आचरण के तौर-तरीके सोखता है, बातचीत का ढंग एवं शिष्टाचार सीखता है। विद्यार्थी जीवन वास्तव में सोखने का काल है जब व्यक्ति व्यक्तित्व के बल, गुणों में निखार लाने का प्रशिक्षण लेता है। शारीरिक योग्यता न केवल मानसिक बल में वृद्धि करती है बल्कि जीवन की आधारभूत संकल्पना एवं शिष्टाचार के नियमों को समझने में भी सहायता करती है। 


छात्र जीवन चारित्रिक, मानसिक एवं शारीरिक योग्यता को सही अर्थों में समझने एवं क्रियान्वित करने का काल है। किंतु कुछ छात्रों के इस समय के विषय में भिन्न-भिन्न विचार हैं। उनके अनुसार शिक्षकों की डाँट-डपट, अभिभावकों का सख्त रवैया, गृहकार्य पूर्ण करने का दबाव एवं विद्यालय में नियमित उपस्थिति इस जीवनाविधि के सबसे अप्रिय पहलू हैं। वह विद्यालय में बंधन अनुभव करते हैं एवं आकाश में विचरते पक्षी की तरह स्वतंत्र विचरना चाहते हैं। विद्यार्थियों को विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की अवधि में सख्त अनुशासन अप्रिय लगता है। 


ऐसे छात्र अपने विद्यालय के दिनों को कोसते हैं।

किंतु मेरा विद्यार्थी जीवन बहुत सुखद रहा है। यह एक आदर्श जीवन काल था क्योंकि यह हमारे मानस के प्रशिक्षण का काल है। इस अवस्था में जो हमारी बुद्धि पर अंकित हो जाता है। वह सदैव प्रभावशाली रहता है चाहे व अच्छा हो या बुरा। विद्यार्थी अवस्था में ही हमारे भीतर अच्छी एवं बुरी आदतें पड़ती है। हमारी सोच को उचित ए तार्किक ढंग से निर्णय लेने की आदत बनती है। हम अपना कार्य समय से करना सीखते हैं तथा आज्ञाकारी एक अनुशासित बनते हैं। अध्यापकों एवं बड़ों को सम्मान करने में मुझे पूर्ण विश्वास है। मैं सदैव अपने अध्यापकों अभिभावकों का कहना मानता हूँ। यह अभ्यास भी विद्यार्थी जीवन काल की ही देन है।


विद्यालय में ही खेलों में मेरी रुचि जागृत हुई। इसी अवधि में मैंने नाटकों, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना प्रारंभ किया। आज मैं एक अच्छा वक्ता, धावक एवं खिलाड़ी हूँ। इसके अतिरिक्र में शिक्षा के क्षेत्र में भी उच्च स्तर पर स्थित हूँ। हर क्षेत्र में मेरे द्वारा अच्छा प्रदर्शन करने के कारण मैं अपने शिक्षक एवं मित्रों का प्रिय पात्र बन गया हूँ। मेरे अध्यापक मेरा अत्यधिक उत्साहवर्धन करते हैं एवं प्रिंसिपल साहब की दृष्टि एक अच्छा विद्यार्थी हूँ। मैंने परीक्षाओं, खेलकूद, वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं नाटकों में अपने अच्छे प्रदर्शन के  लिये बहुत से पदक, विजयपत्र, ट्रॉफी, शील्ड एवं प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं।


विद्यार्थियों की बुद्धि एक फोटो प्लेट की तरह होती है। उस पर जो भी छाप छोड़ी जाती है वही उनके द्वारा  प्रतिधारित कर ली जाती है। देश भक्ति, बड़ों के प्रति आदर भाव, कर्तव्य बोध, गरीब, दरिद्र एवं लाचारों की सहायता रोगियो की सेवा  शुश्रूषा  एवं   भुखे को खाना  खिलाना  इत्यादी विचार विद्यार्थी मै उन्के विद्यालय के दिनो मै ही  मन में बैठ जाते हैं। स्पष्ट रूप से कहूँ तो विद्यार्थी जीवनावधि केवल पुस्तक पढ़ने, ज्ञान अर्जित करने एवं खेलने के लिए नहीं है; बल्कि यह वह कालावधि है जिसमें सभी अच्छी आदतें डाली जाती हैं, बुरी आदतें दूर की जाती हैं तथा अच्छे स्वभाव, ईमानदारी एवं सकारात्मक सोच का विकास होता है। इसके अतिरिक्त देशभक्ति एवं राष्ट्रीयता जैसे स्वस्थ विचार भी विद्यार्थियों द्वारा इसी कालावधि में हृदयंगम किए जाते हैं।


मेरे विद्यार्थी जीवन काल द्वारा मेरे लिए ऐसी नींव का निर्माण किया जाना चाहिए जिस पर मेरे जीवन की इमारत का निर्माण हो सके। मेरी गलतियाँ एवं असफलताएँ भविष्य में मेरा पथ प्रदर्शन करेंगी। मैं असफलताओं से हतोत्साहित एवं हताश नहीं होता क्योंकि मेरे अनुसार असफलताएँ ही सफलता का पथ प्रशस्त करती हैं। मेरा विद्यार्थी जीवन मेरे लिए एक अच्छा एवं सुंदर अनुभव है। यह मेरे लिए बहुत मूल्यवान है क्योंकि अनुभव ही वास्तविक शिक्षक है। मैं अपने विद्यालय के दिनों को सदैव याद करता रहूँगा।

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