Anidra se mukti । अनिद्रा से मुक्ति ।How to get rid of insomnia । अनिद्रा
Anidra se mukti
अनिद्रा से मुक्ति
How to get rid of insomnia
अनिद्रा
अनिद्रा से कैसे पाए मुक्ति ।
अनिद्रा से छुटकारा
अनिद्रा से मुक्ति

Anidra se mukti । अनिद्रा से मुक्ति
यदि आपको दिनभर कमजोरी और आलस्य महसूस हो या फिर हर समय सोने का मन करे, तो मुमकिन है। कि आप नौद की कमी से जूझ रहे हों।
अनिद्रा सामाजिक, व्यवसायिक कार्यों में अथवा अन्य आवश्यक कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण हानि पहुँचाती है। सतर्कता, एकाग्रता तथा रोज़ाना के कार्यों में भी अनिद्रा के कारण समस्याएं उत्पन्न होती हैं। अनिद्रा के कारण बीमार होने का जोखिम बढ जाता है और भावनात्मक अथवा मानसिक समस्यायें भी हो सकती हैं। अनिद्रा की वजह से बहुत से वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते है। दक्षिण कोरिया के प्रमुख अस्पतालो और यूनिवर्सिटी ने मिलकर एक अध्ययन किया जिसके अनुसार नींद की कमी से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
आप चिकित्सक को अपनी मानसिक समस्या बताते हैं तो वे नींद की दवा दे देते हैं, जो धीरे-धीरे आदत में शुमार हो जाती है। दवा के गलत प्रभाव भी हो सकते हैं। हाँ, योग्य, अनुभवी एवं जनहितकारी चिकित्सक दवा की डोज़ धीरे-धीरे कम करते हुए अनिद्राग्रस्त व्यक्ति को जीवन शैली में बदलाव लाने और तनावमुक्ति के उपाय अपनाने को कहते हैं।
क्यों आती है नीद?
सुबह शारीरिक किवाये (बॉडी फन्कशन्स शुरू होते ही मस्तिष्क में 'स्लोप हारमोना मेलाटोनिन' का स्त्र होने लगता है ताकि रात होते होते नींद की गोद में चला जाए इंसान। उम्र दलने के साथ-साथ प्रकाश के प्रति बोडो क्लॉक (शारीरिक घड़ी) की संवेदनशीलता कम होती जाती है. यही वजह है कि दिन में बुजुर्गों को युवाओं के मुकाबले ज्यादा नींद आती है। बॉडी क्लॉक ठोक तरह से तभी काम करती है जब व्यक्ति का सोने जागने, खाने-पीने और व्यायाम करने का समय तय हो।
कितनी नींद चाहिये?
कितनी नौद लेनी चाहिए, इस पर अलग-अलग राय है। आमतौर पर एक वयस्क के लिए छ घंटे की नीद अच्छी मानी जाती है लेकिन योगों सोन-चार घंटे की नींद से ही तरोताजा हो जाते हैं। जिन्हें अर्थोपार्जन हेतु सुबह से शाम तक कार्य करना पड़ता है उन के तन-मन के लिए रात में जल्दी सोना और प्रातः जल्दी उठना अच्छा है। रात्रि को अगर चार पहरों में बांट से तो द्वितीय पहर (9 से 12) के बोच ली गई नींद अन्य पहरों के मुकाबले ज्यादा आराम देती है। अपनी-अपनी प्रकृति के हिसाब से कायदे की नींद बेहद जरूरी है। ध्यान सबको रिलेक्स करता है पर अच्छी नौद की बराबरी नहीं कर पाता।
फ्रांस की कैथोलिक यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में दावा किया गया है कि अच्छी नींद लेने वाले लोग ज्यादा रचनात्मक होते हैं। उनमें कहीं ज्यादा एनर्जी होती है। रात में ठीक से नहीं सोने वाले अपने काम में ज्यादा गलतियाँ करते हैं। वे लोग कितने भाग्यशाली हैं, जो बिना किसी दवा के बिस्तर पर लेटते ही सो जाते है।
जीवन शैली में बदलाव जरुरी है
बदलती जीवन शैली ने बड़ों के साथ-साथ बच्चों और किशोरों को भी प्रभावित किया है। यही कारण है। कि बच्चे भी अनिद्रा के शिकार हो रहे है। इसके पीछे 'कार्बोनेट आधारित पेय पदार्थों के प्रति बच्चों की दीवानगी को बड़ी वजह माना जा रहा है। ब्रिटेन की संस्था स्लीप स्टडी काउन्सिल की शोधकर्त्ता जेसिका एलेक्जेंडर ने कहा है कि सोने से ठीक पहले खाना ना खाये और कैफिन-युक्त पेय अथवा सॉफ्ट ड्रिंक से परहेज करे ।
एक और विज्ञान द्वारा उपलब्ध कराये साधनों ने हमारे शारीरिक श्रम को बहुत कम कर दिया है और दूसरी और हम ज्यादा कैलोरीयुक्त खान -पान के अभ्यस्त होते जा रहे है जिससे एक तो मोटापे की समस्या बढ़ रही है, दूसरा, आवश्यक शारीरिक श्रम के अभाव में हम प्राकृतिक गहरी नोंद को खोते जा रहे है।
बेहतर नींद के लिए कुछ सुझाव
सोने से पूर्व कम्प्यूटर अथवा टी.वी. के प्रयोग एवं किसी प्रकार को बहस से बचे। कुछ देर 'कर्णप्रिय' संगीत सुनना सहायक होगा। आदत डालें कि सोने का समय निश्चित हो। जब नींद आने लगे, तभी सोने जायें। शयन-कक्ष स्वच्छ, शान्त एवं अनुकूल रखें। तनावमुक्त होकर सोने की आदत डालें। तनावमुक्ति के लिए कहना तो आसान है परन्तु उसे चोड़ पाना मुश्किल अनुभव होता है। तनाव से निजात पाने में ध्यान मदद करता है।
सोने से पूर्व चटपटे व मसालेदार भोजन से दूर रहे। कैफिन-एलकोहल का सेवन न करें तो अच्छा है। अगर नींद नहीं आ रही है, तो कोई रोचक किताब पढ़े। नियमित रूप से व्यायाम करें, खासकर दिन के प्रारम्भ में अथवा शाम की शुरूआत में यथा सम्भव दिन में सोने से बचना चाहिए, तथापि कोई रात में जगता है तो दिन में कुछ समय के लिए सो सकता है। गर्मी के दिनों में दिन में कुछ देर सोना वर्जित नहीं है। सिर, तलको एक हथेली पर सोने से पूर्व मालिश करना वांछनीय है। मालिश से सपने नियंत्रित होते है। सोने से पहले हलका गर्म दूध पीना भी सोने में मदद करता है।
जो प्राप्त है, उसका आनन्द ले ।
उपरोक्त सभी बातें तभी सहायता करती है जब हम मानसिक रूप से किसी हद तक स्वस्थ है। तन के अच्छे स्वास्थ्य के लिए मन का स्वस्थ होना प्रथम आवश्यकता है। मन में सुकून के लिए अपनी सोच को बदलें। जो हमारे पास है उसका आनन्द ले और जो नहीं है उसे याद कर दुःखी न हो किसी भी बात को लिखने से तनाव और पीड़ाएँ कम होती है। नींद तभी आती है जब हम अपने मस्तिष्क को निष्क्रिय कर लेते हैं। कुछ भी हो, हम मानसिक तौर पर अच्छी पृष्ठभूमि बना ले तो नींद अच्छी आ सकती है।
इस आपाधापी के युग में कभी कभी समस्याओं का आना स्वाभाविक है। यदि परेशान है तो तुरन्त सोने की तैयारी न करें। अच्छा होगा, मन को पहले शान्त करें और महसूस करे कि शरीर शिथिल होने जा रहा है। मतलब यह है कि शरीर और मन को पूरी तरह शान्त करें। मन पूरी तरह अपने काबू में किया जा सकता है। ऐसे मन को हो 'शिक्षित मन' कहते हैं। यह ही एक अच्छे व्यक्तित्व का लक्षण है। यदि हम ऐसा कर लेंगे, तो नोट कोई समस्या नहीं होगी। अक्सर लोग नोंद की दवाई लेने लगते है परन्तु यह
अच्छी आदत नहीं है। इसके लेने से लगता है जैसे कि हम नशे में हैं। सुस्ती आती है। सबसे खतरनाक बात तो यह है कि इसकी आदत पड़ जाती है। अच्छा होगा कि हम पांच से दस मिनट मनन एवं ध्यान करें। ऐसा करने से मन शान्त हो जायेगा, सोने में जल्दी मदद मिलेगी और सुबह हम तरोताजा उठेंगे।
राजयोग द्वारा अनिद्रा से मुक्ति
अखिर लोग अनिद्रा से परेशान होकर दवाईयों का सहारा लेने के लिए अपने शहर के जिस चिकित्सक के पास गयी, चिकित्सक ने उसे राजयोग (मेडिटेशन) से परिचित कराया। उसने अनिद्रा रोग से पीड़ित उस व्यक्ति को राजयोग सीखने की सलाह दी। राजयोग के अभ्यास से उस व्यक्ति को शनैः शनैः अनिद्रा की जटिल समस्या से छुटकारा प्राप्त हो गया। आज वह 60 से अधिक वर्ष की उम्र में तन और मन से स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रही है। और बहुत खुशमिजाज रहती है। यह तो एक उदाहरण मात्र है। ऐसे अनेक लोगों को राजयोग से बहुत लाभ हुआ है, जो अनिद्रा रोग से पीड़ित थे।
राजयोग (मेडीटेशन) के अभ्यास से मस्तिष्क की तंत्रिका प्रणाली को सामान्य रूप से कार्य करने में सहायता मिलती है। मस्तिष्क शरीर के विभिन्न अंगों को बेहतर ढंग से दिशा निर्देश दे पाता है और हारमोन्स स्त्रवित करने वाले सभी सूक्ष्म अंग उचित प्रकार से अपना कार्य संचालन करते हैं जिससे शरीर के समय स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नींद लाने के उत्तरदायी हार्मोन्स का स्त्राव भलीभाँति होने से बॉडी बलाक ठीक रीति से काम करती है जिससे अपने निश्चित समय पर नींद आ जाती है।
राजयोग से विचार प्रवाह धीमा हम सब जानते है कि हमारा मन सदैव कुछ ना कुछ सोचता रहता है। सामान्य व्यक्ति के मन में एक मिनट में 20-30 विचार उत्पन्न होते हैं। यदि विचारों का प्रवाह प्रति मिनट तीस से ज्यादा हो जाता है तो हम तनाव अनुभव करने लगते हैं। राजयोगी के मन मे संकल्पों-विकल्पों यानि विचारों. का प्रवाह अपेक्षाकृत धीमा होता है। जिससे दिमाग कम थकता है, कम ऊर्जा खर्च होती है व आत्मिक बल वह जाता है। प्रातः 4-3 बजे के में तीस मिनट राजयोग का अभ्यास करने की आदत मन को आनन्दित व ऊर्जावान बनाती है।
निस्कर्ष
Conclusion
यह post (पॉसट) मै हमने आपको अनिद्रा यानी insomnia से छुटकारा पाने का उपाय बताया है । उसके साथ ही अनेक जानकारी भी उप्लब्ध कराई है । अनिद्रा से मुक्ति के लिये अपनी जीवन शैली मै बदलाव लाए । अपको जो प्राप्त है उसका आनन्द ले, सदा सुखी रहे । तथा राजयोग , कसरत,meditation, excerise जरुर करें ।