Ameer logo ke 5 niyam । अमीर लोगो के 5 नियम । 5 Rules of rich people hindi

थॉट प्रोसेस है वही हमारी फाइनेंशल स्पिरिचुअल या फिजिकल जर्नी डिसाइड करता है, Ameer logo ke 5 niyam । अमीर लोगो के 5 नियम । 5 Rules of rich people hind

 अमीर लोगो के 5 नियम 

Ameer logo ke 5 niyam
5 Rules of rich people hindi 
Ameer kaise bane

अमीर और गरीब के सोच और तकनिक मे अन्तर

अमीर कैसे बने ?


आप अक्सर सोचते होन्गे की इनके पास इतने पैसे कहा से आये, या फिर काश मेरे पास भी इतना पैसे होते।या फिर येह लोग क्या करते है,की इनके  पास इतना पैसा है,और मै इतना पैसा  कैसे कमाऊ। येह जो काम करते है वो काम तो मै भी कर्ता हू,परंतु मेरे पास इतना काम पैसा क्यू, आइये जानते है।

Rules of rich people hindi
Rules of rich people hindi 










अमीर लोगो के 5 नियम


अगर मैं आपको बोलूं कि आपको हर साल एक करोड़ रुपए कमाने और आपकी नेटवर्थ (networth)सौ करोड़ होनी चाहिए तो आपको क्या फील हुआ। अपने मन में आपने क्या बोला। क्या आपको डर लगा। क्या आपको लगा कि यार  यर तो बहुत ही  बड़ा गोल (लक्ष्य) है । या थोड़े अनकंफर्टेबल  हो गये,या मन में आपने कुछ ऐसा कहा की   एक करोड़ रुपए हर साल सौ करोड़ की नेटवर्थ चाहिए। या फिर पूरी जिंदगी पागलों की तरह क्या मैं काम करता रहूंगा।जिन्दगी भी तो जीनी है मुझे या फिर मुझे चाहिए नहीं  पैसे मै तो ऐसे ही  खुश हू,या  फिर मेरे पास और चीजों के लिए टाइम ही नहीं बचा। या फिर अभी तो मैं छोटा हूं यार अभी तो मेरी एज Age ही  बहुत कम है। या हो सकता है फिर आपने कुछ ऐसा कहूं मुझे पता ही नहीं कि मैंने पैसे kamaunga (earn) kaise या फिर मेरा सबसे फेवरिट। अगर मैं अमीर हो गया तो इसका मतलब है कि मैं बाकी लोगों के पैसे ले रहा हू । ऑर्थर कहते हैं कि इनमें से आपने जो भी अपने मन में कहा ये आपका मनी ब्लूप्रिंट था। और यही डिसाइड करेगा कि financial  life कैसी रहेगी। क्या हम अमीर बन पाएंगे या नहीं। अच्छा एक बात बताई कि अगर आपके रूम में एक AC लगाया हुआ है और उसका टेम्प्रेचर 23 डिग्री सेल्सियस पर फिक्स कर लिया अब अगर रूम में 27 डिग्रीसेल्सियस हो जाता है तो क्या होगा। आप कहेंगे और अगर AC ओन है तो रूम टेम्प्रेचर दुबारा 23 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाए। अच्छा अगर रूम टेम्प्रेचर सेवंती डिग्री सेल्सियस हो तो भी हमें पता है कि AC की वजह से वो दुबारा से टूटी थी डिग्री सेल्सियस पहुंच गई। आर्थर कहते हैं कि हमारा ब्रेन बिल्कुल इस एग्जाम्पल में एयर कंडीशन की तरह है यानी हमारे ब्रेन

में जो ब्लूप्रिंट है यानी जो थॉट प्रोसेस है वही हमारी फाइनेंशल स्पिरिचुअल या फिजिकल जर्नी डिसाइड करता है। डॉनल्ड ट्रंप एक बार बिलियन डॉलर्स के उधार में पहुंच गए थे लेकिन दुबारा उन्होंने सिर्फ अपनी पुरानी  wealth recover  नहीं  की गई बल्कि पुरानी wealth से भी ज्यादा पैसे कमाए। क्यों क्योंकि उनके ब्रेन एक अमीर इंसान का ब्लूप्रिंट छपा है। लेकिन अगर हम माइक टाइसन की बात करें तो अपनी बॉक्सिंग फाइट की वजह से उन्होंने भी मिलियन डॉलर कमाए थे। लेकिन सब पैसे गंवाते अगेन। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने अपने mind  मै पैसों की ब्लूप्रिंट को कभी चेंज नहीं किया।

इसलिए आज की पोस्ट में हम टी हाफ (T.Harv Eker)की बुक सीक्रेट्स ऑफ मिलेनियर  माइंड ( sectets of millionaire mind)से पैसों के उन ब्लूप्रिंट को डिस्कस करेंगे जो हमें फाइनैंशली स्टेबल बना सकते हैं।

तो सबसे पहला वेल्थ प्रिंसिपल कहता है


1.Rich people think both

Poor people think either/or




Author कहते हैं कि अमीर माइंडसेट वाले लोग सोचते हैं कि उन्हें सब कुछ मिल सकता है लेकिन गरीब mindset वाले लोग सोचते हैं कि उन्हें दो में से एक ही चीज मिल सकती। फॉर एग्जाम्पल एक गरीब माइंडसेट वाला इंसान सोचे। या तो मै अमीर बन सकता हूं या फिर मैं एक अच्छा इंसान बन सकता हूं। या तो मेरे पास पैसे होंगे या मैं अपने परिवार से प्यार कर सकता हूं या तो मैं फाइनैंशली स्टेबल हू या फिर मैं स्पिरिचुअल हो सकता हूं भगवान पर विश्वास कर या तो मैं अमीर बन सकता हूं या मैं अपनी हेल्थ पर ध्यान दे सकता हूं। या तो मेरे पास पैसे हों या अपने परिवार वालों के साथ टाइम गुजार सकता हूं लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक अमीर माइंडसेट वाला इंसान  के इन प्रसन का क्या उत्तर होगा ।

वो कहेगा मुझे दोनों चीजें चाहिए। इसके लिए author एक एग्जाम्पल देते। वो कहते हैं कि उन्हें एक एरिजोना में एक घर चाहिए था जो कि एक मिलियन डॉलर से कम कीमत पर हो। लेकिन एक रियल एस्टेट एजेंट ने उनसे कहा कि उन्हें इस एरिया में एक मिलियन डॉलर से कम प्राइज पर कोई भी घर बिल्कुल नहीं मिल सकता। आर्थर कहते हैं कि मैक्सिमम लोग अगर इस  situation में होते हैं और अगर उन्हें उसी जगह पर घर चाहिये हो तो वो या तो अपना बजट बढ़ाने की कोशिश करते या फिर वो सोचते कि चलो यार कहीं और ही सस्ते में घर देखे थे लेकिन author ने हर नही  मनी और बहुत सारे रियल एस्टेट एजेंट्स को कॉन्टैक्ट किया और फाइनली उन्हें एरिजोना में  सेम टाइप का प्लॉट सेम  एरिया 2 लाख डॉलर कम प्राइज में मिला। इसे कहते हैं यस वी कैन (Yes we can )हैव both .



नेक्स्ट प्रिंसिपल कहता है रिच पीपल थिंक बिग पुअर पीपल थिंग्स स्मॉल 

2.Rich people think big,

Poor people think small




ये principle  कहता है कि unsuccessfull लोग सोचते हैं कि बस मिनिमम से मिनिमम टास्क किया जाए ताकि बस लाइफ किसी तरीके से गुजर जाए। जब वो स्टूडेंट होते हैं तो बस ये गोल होता है कि बस यार पासिंग मार्क्स आ जाएं। जब कॉलेज में जाते हैं तो ये गोल होता है। बस एक जॉब मिल जाए। जब marriage होती हैं तो वो ये सोचते बस अपने बेस्ट बेकन ने जितने पैसेंजर्स और रिटायरमेंट ने वो ये सोचते हैं कि बस गुजारे लायक पेंशन मिल जाए। इन शॉर्ट unsuccessfull पीपल कभी अनकंफर्टेबल जोन में जा नहीं जाते। They want to play it safe. इन लोगों के सोचने का लॉजिक कुछ इस तरीके से होते हैं कि यार मैं डाइटिंग पर ध्यान तब दूंगा जब मैं मोटा हो जाऊंगा। अब इसके बारे में सोचूं

टेंशन क्यों लूं लेकिन सक्सेसफुल लोग इसके बिल्कुल अपोजिट होते। थिंक बिग वेरी  big , जहां पर unsuccessful  लोग सिर्फ बड़ा सोचने से ही मन में घबराते थे वहां पर सक्सेसफुल लोग सिर्फ बड़ा सोचते ही नहीं बल्कि ऐक्शन लेकर उसे पूरा भी करते हैं और तभी एक पैट्रोल पंप में काम कर रहा लड़का करोड़पति बन जाता है। एक मछुआरे का बेटा इंडिया का प्रेजिडेंट बन जाता है और एक नॉर्मल स्टूडेंट अपनी मेहनत से गूगल का सीईओ बन जाता है।

नेक्स्ट वेल्थ प्रिंसिपल आता  है 


3.Rich people focus on opportunities
,

 poor people focus on obstacles 


ये पोइन्ट  कहता है कि unsuccessfull लोगों की एक सबसे बड़ी गलती होती है और वो ही है कि वो ब्लेम गेम खेलते या फिर खुद इंप्रूव होने के बजाय सक्सेसफुल लोगों से झुलसी  ( jealousy)फील करने लगते। इन लोगों से हमें कुछ इस तरीके के डायलॉग सुनने को मिलते हैं। कितना लकी है जानिए ईडियट। अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद author  कहते हैं कि हम खुद की लाइफ खुद बनाते हैं। अगर लाइफ एक गेम है तो उस गेम के प्लेयर कौन। इस गेम के रूल कौन  सेट करता है हम, कौन डिसाइड करता है कि क्या कब होना। और कौन डिसाइड करता है कि हम जीतेंगे या नहीं।  तो सवाल ये है कि हम  ऐसी गेम हर कैसे सकते। ये हमारी स्टोरी है। हमारी मुख्य हमारी स्क्रिप्ट और pen भी हमारे पास थी इसलिए हम जो चाहे वो लिख सकते हैं।




नेक्स्ट वेल्स प्रिंसिपल कहता है


4.Rich people are bigger than their problems,

 poor people are smaller than their problems.


आर्थर कहते हैं कि सक्सेस का सीक्रेट ये नहीं है कि हम प्रॉब्लम से दूर भागें।

बट ये है कि हम अपनी प्रॉब्लम से बड़े बन जाएँ। प्रॉब्लम के बावजूद एक्शन इसके लिए author  एक एग्जाम्पल देते मान लिजिये  की किसी भी प्रॉब्लम को हम एक से दस की स्क्रीन के बीच में रैंक कर सकते हैं। यानी अगर छोटी प्रॉब्लम है तो उसे हम एक या दो नंबर दें। पर अगर बहुत बड़ी प्रॉब्लम है मन ने जितनी खतना प्रॉब्लम तो हम उसे दस नंबर देंगे तो आप imagine  किजीये की आपके सामने एक फाइव लेवल की प्रॉब्लम है। अब क्यूंकि हम हमेशा डरते रहते हैं और ऐक्शन नही लेते क्यूंकि इस केस में मेरी प्रॉब्लम सॉल्विंग capability दो हैं और प्रॉब्लम का लेवल तो हम प्रॉब्लम को अटेम्प्ट ही नहीं करते बल्कि डरते रहेंगे और स्ट्रेस  लेते रहेंगे ।
ब imagine किजीये  की आप प्रॉब्लम के बावजूद एक्शन ले लेते हैं इसलिए आपका प्रॉब्लम सॉल्विंग लेवल टेन है। अब अगर आपके सामने सेम फाइव लेवल की प्रॉब्लम आती तो शायद हमारा  माइंड उसे रजिस्टर भी नहीं करेगा। हमारे लिए वो बस एक और नहीं प्रॉब्लम और हम उसे सॉल्व करेंगे और अपने नेक्स्ट काम को कम्प्लीट करने के लिए लग जाएंगे। जिसका मतलब है की प्रॉब्लम दोनों को आती है। सक्सेसफुल लोगों को भी और unsuccessful   लोगों को  बस फर्क सिर्फ इतना है कि सक्सेसफुल लोग प्रॉब्लम के बावजूद action ले लेते है और बस यही difference है ।

नेक्स्ट प्रिंसिपल कहता है कि


5.Rich people constantly learn and grow,

poor people think they already know.


Author कहते हैं कि unsuccessfull  people हमेशा सोचते हैं कि वो सब कुछ जानते है वो  अपने पुराने बिलीफ सिस्टम से इतने जुड़े रहते हैं और वो उन विचारों को चेंज करना नहीं चाहते इसलिए वो सेम  ऐक्शन बार बार  ले लेते थे और बार बार फेल होते थे। एक बैंकर जो ऑथर के साथ बिजनेस करना चाहता था उसने एक बार ऑथर

से कहा कि तू मुझे पांच लाख डॉलर दो और अपनी फाइनेंशियल स्टेटमेंट ताकि मैं तुम्हें रिकमेंड कर पाऊं की तुम्हें किस चीज में बिजनेस करना चाहिए। इस पर उसने कहा एक्सक्यूज मी क्या ये उल्टा नहीं हो रहा। तुम मेरे साथ बिजनेस करना चाहते। इसलिए तुम मुझे अपनी फ्यूचर दिखाओ ताकि मैं ये डिसाइड करूं कि मुझे तुम्हारे साथ बिजनेस करना है या नहीं। अथर कहते हैं कि सक्सेसफुल लोग उन लोगों से एडवाइस देते हैं जो उनसे भी ज्यादा सक्सेसफुल लेकिन unsuccessfull लोग उनसे एडवाइज लेते हैं जो उनसे भी गए गुजरे इसलिए उनसे ही जो अपनी लाइफ में वो कर चुके जिसको करने के सपने आप अभी देखने और बेस्ट लोगों से कुछ सीखने का सबसे बेहतर तरीका ये है कि हम उनकी बुक्स पढ़ उनके लाइफ एक्सपीरियंस से सीखें। अब आप में से कई लोग ये सोचेंगे कि यार हमें तो अपना काम करने का टाइम नहीं मिला। हमें बुक्स रीडिंग वगैरह कहां से करें और इसीलिए ।





 


इस पोस्ट में हमने पांच वेलथ प्रिंसिपल्स डिस्कस की थे जिसमें सबसे पहला वेल प्रिंसिपल्स rich people think both,poor people think either,यानी सक्सेसफुल लोग सोचते हैं कि अगर वो अमीर बनी तो उन्हे हेल्थ sacrifice करनी पड़ी या बुरा बनना पड़ेगा। लेकिन author कहते हैं।
अमीर और गरीब के सोच और तकनिक मे अन्तर
अमीर और गरीब के सोच और तकनिक मे अन्तर











कि ऐसा नहीं दुनिया में बहुत सारे रिसोर्सेज हैं और पैसों के साथ साथ आप एक अच्छी health aur  एक अच्छा रिलेशनशिप और चैरिटी भी कर सकते। इसलिए अब से जब हमारे सामने दो ऑप्शन जाएं तो पहले ये सोचो। क्या मैं इन दोनों चीजों को पा सकता हू। नेक्स्ट प्रिंसिपल क्या है कि rich people  think big,poor people think small, यानी unsuccessfull लोग अपनी लाइफ में बस उतना ही काम करना चाहते हैं जो बस उन्हे गुजारे जबकि सक्सेसफुल लोगों को mediocrity अच्छी नहीं लगती इसलिए they want to make it big.

नेक्स्ट प्रिंसिपल कहता है कि

 rich people focus on opportunities, 
poor people think of obstacles. 


यानी जहां पर सक्सेसफुल लोग औपचारिक चीज देखते हैं। अन सक्सेसफुल लोग वहीं पर ब्लेम गेम खेलते हैं बहाने मारते और रीजंस ढूंढते हैं और उनको बताने के लिए कि क्यों वो अपनी लाइफ में कुछ बड़ा नहीं कर पाए ।

नेक्स्ट प्रिंसिपल कहता है rich people are bigger than their problems । यानी जिन प्रॉब्लम को unsuccessfull  लोग बडा मन कर डरते है  सक्सेसफुल लोग उसी प्रॉब्लम को मानते हैं कि हां बसी एक और टास्क जो मुझे कंप्लीट करना हैऔर फाइनली हमने दिखा है की rich people constantly learn and grow यानि सक्सेसफुल लोग अपने से भी ज्यादा सक्सेसफुल लोगों से सीखना चाहते हैं ना कि किसी अंकल या आंटी से। 


आप कमेंट करके हमें ये भी बता सकते हैं कि अब नेक्स्ट पोस्ट किस टॉपिक  मै चाहिये हम पहुंचा देंगे ।

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